Small Cap + Profit Making Companies की Screener Query
सीधा उत्तर: यह Screener Query मुख्य रूप से भारतीय शेयर बाजार की उन स्मॉल कैप कंपनियों को फिल्टर करती है जिनका मार्केट कैप ₹500 करोड़ से ₹5,000 करोड़ के बीच है और जो पिछले 12 महीनों (TTM) में लगातार पॉजिटिव नेट प्रॉफिट कमा रही हैं।
स्मॉल कैप स्पेस में निवेश करते समय सबसे बड़ी चुनौती घाटे वाली और कमजोर कंपनियों से बचना होता है। यह गाइड आपको सिखाएगी कि कैसे साधारण फिल्टर्स की मदद से सिर्फ मुनाफे वाले स्मॉल कैप्स को छांटकर सुरक्षित रिसर्च की शुरुआत की जाए।
1. यह Query क्यों जरूरी है? (Why This Query Matters)
स्मॉल कैप कंपनियों में ग्रोथ की असीम संभावनाएं होती हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि स्मॉल कैप इंडेक्स में लिस्टेड लगभग 40% से 50% कंपनियां या तो घाटे में चल रही होती हैं या उनका मुनाफा बहुत अस्थिर होता है।
शुरुआती निवेशक अक्सर कम शेयर प्राइस देखकर किसी भी पेनी या लॉस-मेकिंग कंपनी में पैसा लगा देते हैं। यह क्वेरी एक ही झटके में सभी घाटे वाली कंपनियों को बाहर कर देती है और आपके सामने केवल वही बिजनेस रखती है जिनकी बैलेंस शीट पर वास्तविक मुनाफा दर्ज है।
2. स्मॉल कैप में अच्छा Business कैसे पहचानें?
केवल नेट प्रॉफिट पॉजिटिव होना ही काफी नहीं है। एक मजबूत स्मॉल कैप बिजनेस की पहचान करते समय इन 5 बुनियादी स्तंभों की जांच करनी चाहिए:
क्या कंपनी का प्रॉफिट सिर्फ एक क्वार्टर में आया है या पिछले 3 साल से लगातार बढ़ रहा है?
क्या कागजों पर दिखने वाला मुनाफा सचमुच बैंक खाते में कैश बनकर आ रहा है?
कंपनी पर कर्ज उसकी इक्विटी के आधे से कम (Debt to Equity < 0.5) होना चाहिए ताकि मंदी में खतरा न हो।
प्रमोटर की हिस्सेदारी मजबूत हो और उनका कोई भी शेयर बैंक में गिरवी (Pledged) न रखा हो।
3. स्मॉल कैप में क्या देखना चाहिए और क्या नहीं?
स्मॉल कैप कंपनियों का विश्लेषण लार्ज कैप कंपनियों से काफी अलग होता है। रिसर्च करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- क्या देखें: कंपनी का मार्केट शेयर अपने छोटे सेक्टर में बढ़ रहा है या नहीं, और क्या कंपनी के प्रोडक्ट्स की मांग बाजार में बढ़ रही है।
- क्या न देखें: केवल सस्ता P/E देखकर आकर्षित न हों; कई बार खराब कॉर्पोरेट गवर्नेंस की वजह से स्टॉक बहुत सस्ता दिखता है (Value Trap)।
- मल्टीबैगर का भ्रम छोड़ें: किसी भी स्मॉल कैप को 'कंफर्म मल्टीबैगर' मानकर अपनी पूरी पूंजी एक जगह न लगाएं।
4. Fundamental Analysis से कनेक्शन
स्क्रीनर क्वेरी केवल एक प्राथमिक छलनी (Initial Filter) है, अंतिम निवेश फैसला नहीं। रिसर्च का सही क्रम इस प्रकार होता है:
Fundamental Analysis ➔ बिजनेस मॉडल, कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (Moat) और मैनेजमेंट की ईमानदारी
Valuation & Risk ➔ सही कीमत पर खरीदारी और रिस्क क्षमता के अनुसार एलोकेशन
5. स्मॉल कैप स्टॉक्स के वास्तविक जोखिम (Risk Awareness)
- भारी अस्थिरता (Extreme Volatility): बाजार में गिरावट आने पर स्मॉल कैप्स 30% से 50% तक बहुत तेजी से टूट सकते हैं।
- लिक्विडिटी रिस्क: मंदी के समय छोटे शेयरों में वॉल्यूम खत्म हो जाता है और खरीदार नहीं मिलते, जिससे एग्जिट करना कठिन हो जाता है।
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिस्क: छोटी कंपनियों में अकाउंटिंग फ्रॉड और प्रमोटर द्वारा फंड्स के गलत इस्तेमाल का खतरा ज्यादा रहता है।
6. नए निवेशकों की 5 आम गलतियां
- ❌ लिस्ट देखकर सीधे खरीदारी करना: स्क्रीनर पर नाम आते ही बिना बैलेंस शीट पढ़े ऑर्डर डाल देना।
- ❌ कैश फ्लो चेक न करना: सिर्फ प्रॉफिट देखकर खुश हो जाना और ऑपरेटिंग कैश फ्लो को नजरअंदाज करना।
- ❌ कम शेयर प्राइस को सस्ता समझना: ₹20 के शेयर को ₹2000 वाले शेयर से सस्ता मान लेना, जबकि वैल्यूएशन P/E से तय होता है।
- ❌ अत्यधिक डायवर्सिफिकेशन: 40-50 स्मॉल कैप खरीद लेना जिन्हें ट्रैक करना असंभव हो जाए।
- ❌ लेटेस्ट तिमाही नतीजे न देखना: पिछले 3 साल का डेटा अच्छा था लेकिन पिछली 2 तिमाहियों से कंपनी घाटे में आ गई हो।
7. 🔎 Screener Query — Copy & Paste
ऊपर बताए गए सभी सिद्धांतों को समझने के बाद, अब आप नीचे दी गई वेरिफाइड क्वेरी को कॉपी करके Screener.in पर चला सकते हैं:
8. हर Condition की सीधी व्याख्या
| Condition | आसान मतलब | क्यों रखा गया? | सावधानी क्या रखें? |
|---|---|---|---|
| Market Capitalization > 500 | कंपनी का बाजार भाव ₹500 Cr से अधिक हो। | अत्यधिक छोटे, ऑपरेटर-ड्रिवन माइक्रो पेनी स्टॉक्स बाहर हो जाते हैं। | ₹500 करोड़ से ऊपर भी कुछ कंपनियों में लिक्विडिटी कम हो सकती है। |
| Market Capitalization < 5000 | कंपनी का बाजार भाव ₹5,000 Cr से कम हो। | रिसर्च का दायरा पूरी तरह उभरती स्मॉल कैप कंपनियों तक सीमित रहता है। | तेजी से बढ़ती कंपनियां जल्द ही मिड कैप ब्रैकेट में प्रवेश कर सकती हैं। |
| Net Profit > 0 | कंपनी का ट्रेलिंग 12 महीने का कुल नेट प्रॉफिट पॉजिटिव हो। | सुनिश्चित करता है कि कंपनी सालाना स्तर पर मुनाफे में काम कर रही है। | यह देखना जरूरी है कि प्रॉफिट कोर बिजनेस से आया है या कोई एसेट बेचकर। |
| Net Profit latest quarter > 0 | पिछली तिमाही में भी कंपनी ने मुनाफा कमाया हो। | हाल ही में घाटे में आई कंपनियों को स्क्रीन से तुरंत बाहर करता है। | साइक्लिकल बिजनेस में किसी एक क्वार्टर में मौसमी असर दिख सकता है। |
9. Screener पर Step-by-Step Use कैसे करें?
- ब्राउज़र में Screener.in ओपन करें।
- मेनू में Screens विकल्प पर जाएं और Create a search query पर क्लिक करें।
- ऊपर दिए गए बॉक्स से Copy Query बटन दबाएं और कोड को खाली बॉक्स में पेस्ट करें।
- Run this Query बटन दबाएं।
- सामने आई लिस्ट में कंपनियों की संख्या देखें और एक-एक करके उनके फाइनेंशियल्स का अध्ययन करें।
10. रिजल्ट आने के बाद Query कैसे कस्टमाइज करें?
यदि परिणाम में 100 से अधिक स्टॉक्स आ जाएं और आप केवल सुपर-क्वालिटी स्मॉल कैप्स देखना चाहें, तो आप इसमें ये अतिरिक्त शर्तें जोड़ सकते हैं:
Market Capitalization > 500 AND
Market Capitalization < 5000 AND
Net Profit > 0 AND
Return on capital employed > 15 AND
Debt to equity < 0.5 AND
Sales growth 3Years > 12
11. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
12. रिसर्च चेकलिस्ट (Checklist)
- क्या आपने Query को Screener पर सही तरीके से रन किया?
- क्या आपने कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट और बिजनेस मॉडल समझ लिया?
- क्या पिछले 3 साल का ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव है?
- क्या कंपनी पर कर्ज नियंत्रण में है (Debt to Equity < 0.5)?
- क्या प्रमोटर के शेयर बैंक में गिरवी नहीं रखे हैं?
- क्या आपने अपने पोर्टफोलियो में स्मॉल कैप एलोकेशन की रिस्क लिमिट तय की है?
1. सीधी Query: Market Capitalization > 500 AND Market Capitalization < 5000 AND Net Profit > 0 AND Net Profit latest quarter > 0
2. मुख्य काम: घाटे में चल रही और अत्यधिक रिस्की पेनी कंपनियों को हटाकर केवल प्रॉफिटेबल स्मॉल कैप्स की लिस्ट बनाना।
3. गोल्डन रूल: स्क्रीनर सिर्फ पहला कदम है; असली रिटर्न कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो की गहरी जांच से बनता है।

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